October 25, 2021

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क्या नाम बदलने से इस मुल्क के हालात बदल जाएंगे? HAMZA SUFYAN

क्या इससे किसी की जिंदगी पर कोई फर्क पड़ेगा? क्या इससे बढ़ती महंगाई कम हो जाएगी? क्या इसी नौजवानों को रोजगार मिल जाएगा? क्या गिरती हुई अर्थ व्यवस्था सही होजाएगी? क्या इससे मुल्क के लोगों के हालात बेहतर होजाएंगे? क्या इससे कानून व्यवस्था ठीक होजाएगी?
जो असल काम है सरकार का जनता की सेवा करने का वह तो इन्होंने किया नहीं।
कोरोना काल में जनता को ऑक्सीजन नहीं दे पाए, हस्पताल में लोगों को बेड नहीं दे पाए, शमशान में लकड़ी तक नहीं दे पाए। लाशें नदियों में खुले आम बह रही थीं जिसको कोई पूछने वाला नहीं था। इज़्ज़त की जिंदगी तो दूर इज़्ज़त की मौत भी नही दे पाए।
स्वस्थ पर, शिक्षा पर, रोज़गार पर, किसान की कर्ज माफी पर, दलित और मुसलमान पर जो लगातार अत्याचार हो रहा है उसपर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। 2019 में राजा महेन्द्र प्रताप के नाम पर विश्विद्यालय खोलने की घोषणा हुई थी वो भी सिर्फ आज तक कागज़ों तक ही रह गई है।
जो वादे करके यह सरकार सत्ता में आई चाहे वो 2 करोड़ नौकरियोंका वादा हो, या काला धन लाने की बात हो, या स्मार्ट सिटी बनाने की बात हो उसपे आज तक किसी तरह का कोई काम नही हुआ है। जो नारा इन्होंने दिया था सबका साथ और सबका विकास उसमे भी इन्होंने धोका किया है। न ही यह किसी को साथ लेके चल पाएं हैं न कोई आज तक विकास हुआ है।
अगर नाम बदलने से ही सारे मसले हल होजाते हैं तो ये लोग इस मुल्क का नाम बदल के विकास क्यों नहीं कर देते? अगर इस तरीक़े की ध्रुवीकरण की राजनीति अगर ये लोग नहीं छोड़ेंगे तो आज़ाद समाज पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब चंद्र शेखर आजाद साहब के निर्तित्व में एक बहुत बड़े आंदोलन की तैयारी में है और इस बार 2022 में इनको किसी भी सूरत में सत्ता में बैठने नहीं देंगे।

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