पैगम्बर मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (स०) का जीवन सभी मुसलमानों के लिए एक रहमत है तथा वह पूरी मानवजाति के लिये एक उद्हारण हैं।

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पैगम्बर मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (स०) का जीवन सभी मुसलमानों के लिए एक रहमत है तथा वह पूरी मानवजाति के लिये एक उद्हारण हैं। उन्होंने अपने सामान्य जीवन में हमेशा हिंसा का जवाब सहिष्णुता तथा प्रेम से दिया और सभी को यह पाठ पढ़ाया कि लोगों का दिल प्रेम तथा अच्छे आचरण से जीतें। ये विचार आज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित आनलाइन ईद मिलाद-उन-नबी बैठक में वक्ताओं ने व्यक्त किए।
कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि पवित्र पैगंबर (स०) ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य और नैतिकता का प्रदर्शन किया और वह हर भूमिका में अनुकरणीय साबित हुए। उन्होंने कहा कि सादगी, विनम्रता, करुणा, न्याय, अच्छा व्यवहार, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और ज्ञान पवित्र पैगंबर के जीवन का अभिन्न अंग थे।
प्रोफेसर मंसूर ने कहा कि “पैगंबर मोहम्मद का संदेश पूरी मानवता के लिए है, न कि केवल मुसलमानों के लिए। उन्होंने अल्पसंख्यकों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत को अपनाया और उन्हें दुर्व्यवहार की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा पवित्र पैगंबर के संदेश को नकारती है।
सहकुलपति प्रोफेसर जहीरुद्दीन ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि पवित्र पैगंबर (स०) को पूरी मानवता के लिए दया के रूप में भेजा गया था और एक बैठक में उनकी विशेषताओं और उनकी शिक्षाओं पर विचार करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें पैगंबर साहब की शिक्षाओं को अपने प्रतिदिन अभ्यास का हिस्सा बनाना होगा।
इस अवसर पर धर्मशास्त्र संकाय के पूर्व डीन, प्रोफेसर सैयद फरमान हुसैन ने कहा कि अच्छी बात करना, अच्छे कार्य करना, अच्छा इरादा और सदाचार पर दृढ़ता पैगम्बर साहब के आचरण का सार है। उन्होंने कहा कि पैगम्बर साहब के जीवन (सीरत) के ये चार पहलू हमारे सामने होने चाहिए। उन्होंने कहा कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने विरोधियों और शत्रुओं के साथ भी उच्च स्तर की नैतिकता दिखाई, इसलिए हमारे जीवन का नैतिक आधार भी इतना दृढ़ होना चाहिए कि देखने वाले को स्वतः ही पता चल जाए की हम पैगंबर साहब के अनुयायी हैं जिन्हें पूरे ब्रह्माण्ड के लिए दया के रूप में भेजा गया था।
सुन्नी धर्मशास्त्र विभाग के प्रोफेसर मुहम्मद सऊद आलम ने अपने संबोधन में कहा कि जब पैगंबर मुहम्मद (स०) ने मक्का में लोगों को अल्लाह का संदेश देना प्रारंभ किया तो लोग आक्रामक हो गए तथा उनपर पथराव किया और उन्हें मारने की साजिश रची। परन्तु घोर विरोध के बावजूद पवित्र पैगम्बर ने उच्च कोटि की सहिष्णुता का प्रदर्शन किया। उनकी मेहनत और करुणा हमारे लिए एक मॉडल होनी चाहिए। सीरत-ए-पाक से हमें मूल संदेश मिलता है कि हिंसा का संयम के साथ जवाब दिया जाना चाहिए और गुस्से को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
प्रोफेसर सऊद आलम ने कहा कि लगभग डेढ़ सौ साल पूर्व जब एक अंग्रेज पदाधिकारी विलियम मूर ने मुहम्मद साहब के जीवन पर पुस्तक लिखी और उसमें उनपर आपत्तिजनक बातें लिखीं तो इससेे हर किसी का दिल दुख गया। सर सैयद अहमद खान का दिल भी दुखी था परन्तु उन्होंने आमजन की भांति विरोध करने के बजाए पुस्तक के रूप में ही उसका जवाब देना उचित समझा। सर सैयद ने इस पुस्तक को लिखने के लिए पवित्र टोरा और इंजील का अध्ययन किया और हिब्रू भी सीखी।
प्रोफेसर सऊद आलम ने कहा कि मक्का में जो प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा हुई थीं ऐसी परिस्थितियां आगे भी पैदा हो सकती हैं। अतः हर मुसलमान की जिम्मेदारी है कि वह अल्लाह के नबी (स०) को अपना रोल माडल बनाये और क्षमा जो उनके आचरण की मुख्य पहचान है, उसे अपने जीवन में उतारें।
धर्मशास्त्र संकाय के डीन प्रोफेसर मुहम्मद सलीम ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन छात्रों के मनोबल को मजबूत करते हैं और उन्हें सदाचारी बनाने में सहायक होते हैं।
इस अवसर पर, कुलपति ने प्रोफेसर सैयद फरमान हुसैन का शाल पहना कर स्वागत किया और सहकुलपति प्रोफेसर ज़हीरउद्दीन ने प्रोफेसर सऊद आलम को शाल भेंट की। बैठक में एएमयू स्कूलों के छात्रों मोहम्मद अब्दुल्ला मुजतबा और इनामा जेहरा ने नात प्रस्तुत की।
ईद मिलाद-उन-नबी कार्यक्रम के मेजबान और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री अब्दुल हमीद (आईपीएस) ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इससे पूर्व प्रातः 10ः45 बजे कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने मौलाना आजाद लाइब्रेरी द्वारा आयोजित आनलाइन सीरत प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय के लाइब्रेरियन डा० मुहम्मद यूसुफ ने बताया कि प्रदर्शनी में पवित्र पैगंबर (स०) की जीवनी पर आधारित दुर्लभ पांडुलिपियां और उर्दू, हिंदी, अरबी, फारसी और अंग्रेजी में महत्वपूर्ण प्रकाशन को रखा गया है। पवित्र कुरान की प्राचीन और दुर्लभ प्रतियों को भी प्रदर्शनी में शामिल किया गया है।


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